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सर्दी जुकाम का घरेलू उपचार - Jukam ka ilaj

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सर्दी जुकाम को ठीक करने के घरेलु उपचार?

पहला प्रयोग सर्दी जुकाम में 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ दूध में उबालकर सेवन करना चाहिए।  दूसरा प्रयोग  सर्दी जुकाम होने पर तुलसी के रस में अदरक का रस मिलाकर सेवन करने से सर्दी में लाभ होता है। मात्रा -10 मिलीलीटर तुलसी का रस, 15 मिलीलीटर अदरक का रस दोनों को मिलाकर सेवन करें।  तीसरा प्रयोग  सर्दी जुकाम होने पर एक गिलास दूध में 2 से 10 ग्राम तक काली मिर्च और 1 से 5 ग्राम तक हल्दी उबालकर पीने से सर्दी जुकाम में लाभ होता है। चौथा प्रयोग  सोंठ जल सर्दी जुकाम होने पर सोंठ जल तैयार करें। सोंठ का जल तैयार करने की विधि -
एक भिगोने में 1 किलो पानी भरकर गैस पर रखें। इस पानी में एक साबुत सोंठ की गांठ डालकर पानी को इतना उबालें कि वह आधा रह जाए। इस उबले हुए पानी को निथार कर पीने से सर्दी खांसी, सिर दर्द में काफी आराम मिलता है।

लू लगने पर घरेलू उपचार - Lu lagne ke lakshan

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लू किसे कहते है?
गर्मी के दिनों में जो गर्म हवा चलती है खास तौर से मई जून के महीने में चलने वाली गर्म हवाओं को लू कहते है।

लू क्यों लगती है?

गर्मी के दिनों में सूर्य की किरणें अत्यंत उष्ण (गर्म) हो जाती हैं।

इनके संपर्क से हवा रुक्ष (सूखी) हो जाती है।

जब हम गर्मी के दिनों में दोपहर के वक्त घर से बाहर जाते हैं तब यही उष्ण और रुक्ष हवा हमारे शरीर की नमी या आद्रता को सोख लेती है और हमें लू लग जाती है।

लू लगने के लक्षण क्या हैं?



1. लू लगने पर चेहरा लाल हो जाता है।

2. लू लगने पर सांस लेने में कष्ट होने लगता है।

3. लू लगने पर त्वचा शुष्क (सूखना) हो जाती है।

4. लू लगने पर प्यास अधिक लगती है।

5. लू लगने पर कभी-कभी सिर और गर्दन में पीड़ा होने लगती है।

6. लू लगने पर कभी-कभी व्यक्ति बेहोश भी हो जाता है।

लू से बचाव के तरीके?
1. लू चलने के दिनों में पानी अधिक पीना चाहिए।

2.

त्रिफला के फायदे हिंदी - Triphala ke fayde

त्रिफला किसे कहते हैं? आंवला, हरड़, बहेड़ा तीन वस्तुओं का मिश्रण त्रिफला कहलाता है।

त्रिफला का चूर्ण कैसे बनता है? त्रिफला का चूर्ण बनाने के लिए आंवला, हरड़, बहेड़ा तीनों को समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण तैयार किया जाता है। यह चूर्ण 1 से 7 ग्राम तक सेवन किया जा सकता है।

त्रिफला चूर्ण के औषधीय गुण क्या है?औषधीय प्रयोग  1. आंखों के रोग  आंखों के सभी रोगों के लिए त्रिफला एक उत्तम अक्सीर है। इस चूर्ण को घी तथा मिश्री के साथ मिलाकर खाने से कुछ महीने में आंखों के रोग दूर होते है। जैसे नेत्रों में सूजन, जलन, दर्द, लालिमा आदि अगर आंखों में खुजली लगती हो तो त्रिफला के जल से आंखों को धोएं। त्रिफला चूर्ण का नियमित सेवन करने से नेत्र संबंधी समस्त बीमारियां ठीक होती हैं। व आंखों की ज्योति एवं तेज भी बढ़ता है।

2. त्रिफला जल बनाने की विधि  कांच के बर्तन में 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण 200 ग्राम जल में भिगोकर रखें 5 या 6 घंटे बाद उस जल को ऊपर से निथार कर बारीक स्वच्छ कपड़े से छान लें फिर उस जल से आंखों को धोएं अथवा उस जल में पलकें झपकाए।

3. मोटापा  त्रिफला चूर्ण पानी में उबालकर शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम…

पत्थर बेल के फायदे - Bel pathar ke fayde

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वह बेल जो रोगों का नाश करें।

पत्थर बेल के नियमित सेवन से शरीर सुडौल बनता है।

पत्थर बेल की जड़ उसकी शाखाएं पत्ते, छाल और फल ये सभी औषधियां हैं।

पत्थर बेल में हृदय को ताकत और दिमाग को ताजगी देने के साथ-साथ सात्विकता प्रदान करने का भी श्रेष्ठ गुण है।



यह स्निग्ध (मीठा) मुलायम और उष्ण होता है।

कच्चे और पके पत्थर बेल के गुण तथा उससे होने वाले लाभ अलग-अलग प्रकार के होते हैं।

कच्चे पत्थर बेल का सेवन करने से भूख खुलकर लगती है और पाचन शक्ति भी मजबूत होती है।

कच्ची पत्थर बेल के सेवन से पेट के कीड़ों का नाश होता है।

पके हुए पत्थर बेल के गुण व लाभ पका हुआ पत्थर बेल खाने में मीठा, स्वाद में कसैला, पचने में भारी तथा मीठा खाद्य पदार्थ होता है। पके पत्थर बेल को खाने से पेट ठीक होता है अर्थात पेट साफ हो जाता है।

पत्थर बेल के औषधीय लाभ पेट में मरोड़ होने पर पके हुए पत्थर बेल का सेवन आंतो को ताकत देता है। एक पके पत्थर बेल के गूदे से बीज निकालकर सुबह-शाम सेवन करने से पेट में मरोड़ नहीं होती।

पेट व छाती की जलन 200 मिलीलीटर पानी में 25 ग्राम एक पके बेल पत्थर का गूदा लेकर उसमें 25 ग्राम मिश्री मिल…

खांसी के घरेलू उपाय - Khansi ke upay

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खांसी हो जाने पर शीतोपलादि चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। मात्रा 1 ग्राम चूर्ण में आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करें। 
खांसी हो जाने पर चार से पांच लॉन्ग को घी में भूनकर तुलसी के पत्तों के साथ चबाने से सभी प्रकार की खांसी में लाभ होता है।



खांसी में मुनक्का एवं मिश्री की डली को मुंह में रखकर चूसने से खांसी में बहुत लाभ मिलता है। 

सर्दी, जुकाम एवं खांसी में हल्दी नमक लगे हुए पीले चने, चने ताजे भुने होने चाहिए इनका सेवन सुबह के समय तथा रात को सोते समय करना चाहिए। मात्रा एक मुट्ठी चना सुबह सेवन करें और रात को भी इतनी ही मात्रा में सेवन करे। किंतु चने खाकर पानी न पिएं सर्दी खासी वाले मरीज के लिए यह बहुत सरल प्रयोग है। 

विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि सर्दी, खांसी, जुकाम हो जाने पर भोजन में घी, दूध, मिठाई व खट्टी चीजों का सेवन बंद कर देना चाहिए और चिकनाई युक्त पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए।

अनार खाने के फायदे - Anar ke fayde

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मीठा अनार तीनों दोषों का शमन करने वाला तृप्ति प्रदान करने वाला कसैले रस वाला, बल प्रदान करने वाला, जलन व कमजोरी को दूर करने वाला है।

अनार से मिलने वाले लाभ

अनार खाने से पेट के कीड़ों का नाश होता है।

मीठे अनार का सेवन हृदय को बल देने के लिए बहुत उपयोगी है।

अनार का रस (पित्त शामक) पित्त को शांत करने वाला है।

अनार के रस के सेवन से उल्टी बंद हो जाती है।

अनार के सेवन से अरुचि, अतिसार, छाती की जलन व मन की व्याकुलता दूर होती है।

अनार का रस फेफड़े, हृदय, आमाशय तथा आंतों के रोगों में लाभदायक होता है।

अनार के सेवन से शरीर में शक्ति व स्फूर्ति का संचार होता है।

अनार का औषधी के रूप में उपयोग गर्मी के रोग गर्मियों में गर्मी के कारण सिरदर्द होने पर, लू लगने पर, आंखें लाल होने पर अनार का शरबत पीने से बहुत लाभ मिलता है।

पित्त प्रकोप शरीर में पित्त की मात्रा बढ़ने पर ताजे अनार के दानों का रस निकालकर उसमें मिश्री मिलाकर पीने से हर प्रकार का पित्त प्रकोप शांत होता है। 
अरुचि भोजन के प्रति अरुचि होने पर अनार के रस में सेंधा नमक व शहद मिलाकर इसका सेवन करने से अरुचि मिटती है। 
खांसी खांसी होने …

पपीता खाने के फायदे - Papita ke fayde

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पपीता फरवरी-मार्च एवं मई से अक्टूबर तक के महीने में अधिक मात्रा में मिलने वाला फल है। पके हुए पपीते से मिलने वाले लाभ इस प्रकार हैं

पका हुआ पपीता स्वाद में मधुर, पित्त दोष नाशक, पचने में भारी, गुण में गर्म, पेट साफ करने वाला, हृदय के लिए हितकारी, आंतों के कीड़ों को मिटाने में सहायक होता है। 
पका हुआ पपीता स्वाद में मधुर होता है। 
पका हुआ पपीता पित्त के दोषों का नाश करता है। 
पका हुआ पपीता पचने में भारी, गुण में गर्म होता है। 
पका हुआ पपीता हृदय के लिए हितकारी होता है। 
पका हुआ पपीता आंतो के कीड़ों को मिटाने में सहायक होता है। 
पका हुआ पपीता वायु के दोषों का नाश करता है। 
पके हुए पपीते में विटामिन सी की भरपूर मात्रा होती है। 
पके पपीते के सेवन से सूखा रोग ठीक होता है। 
खाना खाने के 1 घंटे बाद पके पपीते का सेवन करने से कब्ज ठीक होता है। 
पके पपीते के सेवन से अम्लपित्त आदि रोगों में लाभ होता है।
पपीते के सेवन के बाद अजवाइन को चबाकर खाने से फोड़े-फुंसी, पसीने की दुर्गंध एवं पेट के कीड़े आदि का नाश होता है। 
पपीते का औषधीय प्रयोग दुबले व कमजोर बच्चों के लिए दुबले पतले बच्चों को रोज उचित म…

तरबूज खाने के फायदे - Tarbuj ke fayde

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तरबूज गर्मी के मौसम का फल है।

तरबूज लगभग पूरे भारत में पाया जाता है।

पका हुआ लाल गूदे वाला तरबूज स्वाद में मीठा या मधुर गुण में शीतल, पित्त एवं गर्मी का शमन करने वाला, पौष्टिकता एवं तृप्ति देने वाला, पेट साफ करने वाला, खुलकर पेशाब लाने वाला है।

तरबूज के बीजों का भी सेवन किया जाता है। तरबूज के बीज शरीर में स्निग्ध्ता बढ़ाने वाले, पौष्टिक, गर्मी का शमन करने वाले, दिमागी शक्ति बढ़ाने वाले, दुर्बलता मिटाने वाले, गर्मी की खांसी दूर करने वाले होते हैं।

तरबूज के बीज का सेवन प्रतिदिन 10 ग्राम से 20 ग्राम तक कर सकते हैं।

गर्मी के दिनों में दोपहर के भोजन के 2 या 3 घंटे बाद तरबूज खाना लाभदायक है। यदि तरबूज खाने के बाद पेट में कोई तकलीफ हो तो शहद या गुलकंद का सेवन करें।

तरबूज का औषधीय उपयोग
मंदाग्नि तरबूज के गूदे पर काली मिर्च जीरा एवं नमक डालकर खाने से भूख खुलकर लगती है और पाचन शक्ति बढ़ती है।

शरीर पुष्टि तरबूज के बीज की गिरी निकालकर चूर्ण बना लीजिए। एक बड़ा गिलास दूध से भरकर उसमें एक चम्मच तरबूज की गिरी का चूर्ण डालकर उबालिये। गर्म दूध में मिश्री मिलाइए ठंडा करके दूध को पी लीजिए इस दूध के प्र…

पुदीना के फायदे - Pudina ke fayde

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पुदीने का उपयोग अधिकतर चटनी या मसाले के रूप में किया जाता है। 
पुदीना एक सुगंधित एवं उपयोगी औषधि है। 
यह अपच को मिटाता है। 
पुदीना खाने में स्वादिष्ट पचने में हलका तीक्ष्ण, तीखा, कड़वा, उल्टी मिटाने वाला, शक्ति बढ़ाने वाला, वायु नाशक, फेफड़ों में जमे हुए कफ को बाहर निकालने वाला, अरुचि, मंदाग्नि, अफारा, दस्त, खांसी, श्वास, निम्न रक्त, हैजा, अजीर्ण आदि को मिटाने वाला है। 
पुदीने का रस पीने से खांसी, उल्टी, अतिसार, वायु व क्रीमी (कीड़े) का नाश होता है। व हैजा भी ठीक  होता है। 
पुदीने में रोग प्रतिकारक शक्ति उत्पन्न करने की अद्भुत क्षमता होती है एवं पाचक रसों को उत्पन्न करने की क्षमता होती है। 
अजवायन के सभी गुण पुदीने में पाए जाते हैं।
पुदीने के औषधीय प्रयोग

मंदाग्नि (भूख खुलकर न लगना)  पुदीने में विटामिन ए अधिक मात्रा में पाया जाता है। 
पुदीने में जठराग्नि को तीव्र करने वाले तत्व अधिक मात्रा में होते हैं। 
इसके सेवन से भूख खुलकर लगती है। 
पुदीना, तुलसी, काली मिर्च एवं अदरक का काढ़ा पीने से वायु दूर होती है और भूख खुलकर लगती है।
त्वचा विकार दाद-खाज पर पुदीने का रस लगाने से बहुत लाभ होता…

पेट दर्द और गैस - Pet dard ke upay

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पेट दर्द क्या है? प्रत्येक रोगी आहार-विहार में अनियमितता के कारण पेट की बीमारी का शिकार है।

वायु के प्रकोप के कारण पेट के फूलने एवं अपान वायु के निकलने के कारण पेट का तनाव बढ़ जाता है। जिससे बहुत दर्द होता है और चलना भी मुश्किल हो जाता है ऐसी स्थिति को हम पेट दर्द कहते हैं।

पेट दर्द क्यों होता है एवं इसके क्या कारण है?



पेट में दर्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं।

1. खान पान समय पर न करना।

2. देर रात को या रात्रि में देर से भोजन करना।

3. भोजन करते ही तुरंत सो जाना।

4. मैदा से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करना जैसे समोसा, भटूरे, ब्रेड, नूडल आदि एवं अधिक महीन या बारीक आटे का सेवन करना।

5. बासी भोजन करना।

6. बिना भूख लगे बिना पचे भोजन करना पहले से ही पेट में भोजन हो फिर भी कुछ ना कुछ ऐसे में खाते रहना ऐसा करने से पेट में दर्द होने लगता है।

7. भूख रोकने से अथवा भूख लगने पर भी ना खाने से पेट में दर्द होता है और सिर में चक्कर आते हैं।

8. पचने में भारी सब्जियों का सेवन करने से जैसे गोभी अरबी बैंगन भिंडी आदि के खाने से वात का प्रकोप बढ़ जाता है जिससे पेट में दर्द होने लगता है।


क्या पेट दर्द में अंकुरित …

तत्काल कब्ज राहत - Kabj ka ilaj

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कब्ज क्या है? कब्ज के रोगी खान-पान में असयंम के कारण कब्ज का शिकार होते हैं।

कब्ज से ही अनेक बीमारी होती हैं।

भोजन के पश्चात जब हमें मल त्याग की क्रिया ठीक न हो अर्थात हमारा पेट साफ न हो तो उसे कब्जे कहते हैं।





कब्ज होने के दुष्परिणाम क्या हैं? कब्ज पेट के सभी रोगों का मूल है।

कब्ज रहने से हमें अनेक बीमारियां होती हैं जैसे-भूख कम लगना, अजीर्ण होना, अपच, खाना खाने में अरुचि होना,

अफारा व पेट दर्द, सिर दर्द आदि रोग हो जाते हैं।
कब्ज किन कारणों से होता है? कब्ज होने के कारण - बिना रेशेदार भोजन करना।

खाना खाते ही तुरंत पानी पी लेना।

खाना खाते समय भी ठंडे पानी का सेवन करना।

सलाद न खाना।

खाना जल्दी-जल्दी खाना।

मैदे से बने पदार्थों का अधिक सेवन करना।

रात को देर से भोजन करना।

भोजन करने के तुरंत बाद ही सो जाना।

बार-बार स्वाद के लिए बिना भूख के खाना।
कब्ज ठीक करने के उपाय एवं उपचार? 1. स्वाद की गुलामी स्वास्थ्य की घोर शत्रु है।

2. खान-पान को ठीक करके हमें अपने पेट को सदैव साफ रखना चाहिए।

3. रात को देर से कुछ भी ना खाएं भोजन करने के दो घंटे बाद तक ने सोए।

4. मैदे से बने पदार्थों का अधिक सेवन न करें।

5. चोकर…

जौ के फायदे - Jau ka sattu

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जौ क्या होता है? जौ का उपयोग काफी लंबे समय से होता चला आ रहा है।

जौ एक प्रकार का अनाज है।

यह गेहूं की अपेक्षा हल्का अनाज होता है।




जौ का सत्तू कैसे बनाया जाता है? जौ को भूनकर पीसकर उसके आटे में थोड़ा सैंदा नमक और पानी मिलाकर सत्तू बनाया जाता है और पीया जाता है।

नमक की जगह गुड़ का भी उपयोग किया जा सकता है।

सत्तू में घी और चीनी मिलाकर भी खाया जाता है।
जौ का उपयोग कब अधिक किया जाता है? गर्मी की ऋतु में भूख प्यास शांत करने के लिए जौ के सत्तू का उपयोग अधिक होता है।
गर्मी में जौ के सत्तू का क्या महत्व होता है? गर्मी की ऋतु में सूर्य की किरणें अत्यंत उष्ण (गर्म) होती हैं।

गर्मी की ऋतु में प्राणियों के शरीर का जलीयांश (जल की मात्रा) कम हो जाता है जिससे प्यास ज्यादा लगती है इसलिए इस ऋतु में जौ का सत्तू पीना बहुत हितकारी है।

गर्मी की ऋतू में जौ का सत्तू हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है।
जौ के सत्तू के क्या गुण होते हैं? जौ का सत्तू ठंडा अग्नि प्रदीपक (गर्मी शांत करने वाला) होता है।

जौ का सत्तू कब्ज दूर करता है।

जौ का सत्तू कफ एवं पित्त को दूर करता है।

जौ का सत्तू रुक्षता और मल को दूर (पेट साफ़) करता …

निम्बू का उपयोग - Nimbu ke fayde

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गर्मी में नींबू का उपयोग किन किन रूपों में किया जाता है? गर्मी के मौसम में नींबू का शरबत बनाकर पिया जाता है जैसे शिकंजी या नींबू पानी।

नींबू का रस स्वादिष्ट व पाचक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी होता है।
नींबू के क्या क्या गुण होते हैं?





गुणों की दृष्टि से नींबू बहुत अधिक लाभकारी होता है खून की अम्लता को दूर करने का विशिष्ट गुण नींबू रखता है।

नींबू की खटाई में ठंडक उत्पन्न करने का विशिष्ट गुण होता है जो हमें गर्मी से बचाता है।

नींबू में विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है अतः यह खून में पित्त की मात्रा के बढ़ने को कम करता है व स्कर्वी रोग आदि में अत्यंत लाभदायक होता है।
नींबू का सेवन किन किन परिस्थितियों में नहीं किया जाता है? नींबू का सेवन जोड़ों के दर्द में नहीं किया जाता है।

नींबू का सेवन शरीर में कहीं भी सूजन होने पर नहीं किया जाता है।

नींबू का सेवन यदि किसी व्यक्ति को बुखार के साथ खासी जुखाम या फेफड़ों में बलगम जमा हो तो भी नहीं किया जाता है।

नींबू का सेवन सफेद दाग के रोगी को भी नहीं करना चाहिए।
नींबू का औषधि के रूप में प्रयोग किन परिस्थितियों में किया जा सकता है? 1.…

आम खाने के फायदे - Aam ke fayde

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आम गर्मी की ऋतु का फल है।

आम मई, जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में भरपूर मात्रा में मिलने वाला फल है।

आम को फलों का राजा भी कहते हैं।

पका हुआ आम दुबले-पतले बच्चो, बूढ़े व्यक्तियों को व कमजोर लोगों को पुष्ट बनाने के लिए सर्वोत्तम खाद्य फल है।

पका हुआ आम खाने से शरीर में सातों धातुओं की वृद्धि होती है।

पका हुआ आम चूसकर खाने से आंखों को लाभ होता है।

पका आम खाने से दिमागी कमजोरी दूर होती है।

पका हुआ आम उत्तम प्रकार का हृदय पोषक है।

पके हुए आम के खाने से आलस्य भी दूर होता है।


आम का औषधीय उपयोग पेट के रोग व गैस आम के रस में घी और सोंठ डालकर सेवन करने से जठराग्नि तीव्र होती है।

शरीर का बल बढ़ता है और गैस में पित्तदोष का नाश होता है।

पुष्टि व रूप निखार सुबह या शाम के समय आम को चूसकर उसके बाद आधा चम्मच अदरक का रस या अदरक का टुकड़ा सेवन करें और इसके 2 घंटे बाद दूध पीने से शारीरिक बल बढ़ता है। रूप में निखार आता है और शरीर पोस्ट बनता है।

बूढ़े व्यक्तियों के लिए विशेष पुष्टि दायक प्रयोग

सुबह खाली पेट 250 ग्राम पके आम का रस 50 ग्राम शहद और 10 ग्राम अदरक का रस मिलाकर सेवन करें इसके स…

दांतों का इलाज - Dant ka dard

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दांत जल्दी गिरने के क्या कारण होते हैं? खूब ठंडा पानी पीने से या ठंडे पदार्थों का सेवन करने से दांत जल्दी गिर जाते हैं।

जब हम ठन्डे पदार्थो के सेवन के तुरंत बाद गर्म पदार्थो का सेवन करते है या गर्म पदार्थो के सेवन के तुरंत बाद ठन्डे पदार्थो का सेवन करते है तो ऐसा करने से हमारे दांत कमजोर हो जाते है।




दांतो को मजबूत कैसे किया जा सकता है? दांतो की मजबूती के लिए आंवले के चूर्ण को पानी में उबाल कर उस पानी के कुल्ले करने से दांत मजबूत व स्वच्छ (साफ़) होते हैं।

दांतों की चमक के लिए क्या करें? दांतों की चमक के लिए तेजपात के पत्तों को खूब महीन पीस लें और हर तीसरे दिन के अंतराल पर दिन में एक बार इसके चूर्ण से मंजन करने से दांत दूध जैसे सफ़ेद हो जाएंगे।

उल्टी रोकने के उपाय - Ulti ka ilaj

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उल्टी क्यों लगती है? गलत खान-पान की पद्धति से हमें उल्टी लग जाती है।

बिना भूख के खा लेने से अथवा यदि पेट में पहला आहार पचा न हो और हम इसी दौरान दूसरा आहार ग्रहण करें तो पहले आहार का कच्चा रस इसके साथ मिलकर दोष उत्पन्न कर देता है जिससे हमें उल्टी हो जाती है।

कभी-कभी गैस की तकलीफ व अपच के कारण भी उल्टी हो जाती है।

गलत खान-पान से भी यह समस्या पैदा होती है जैसे तरबूज खा कर पानी पी लेना, ककड़ी खीरा तरबूज खा कर पानी का सेवन करने से हमें उल्टी लग जाती है।




उल्टी लगने पर क्या करें? पहला प्रयोग उल्टी लगने पर अदरक के रस में मिश्री मिलाकर पीने से उल्टी होना जी मिचलाना बंद हो जाता है। मात्रा एक चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच मिश्री मिलाकर तीन-तीन घंटे के अंतर से एक-एक चम्मच सेवन करें।
दूसरा प्रयोग अदरक और प्याज का रस समान मात्रा में मिलाकर तीन-तीन घंटे के अंतर से एक-एक चम्मच सेवन करें।
तीसरा प्रयोग हरे धनिया की पत्ती का रस थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में पीने से उल्टी बंद होने लगती है।

उल्टी हो जाए तो क्या खाएं? बार-बार उल्टी होने से पेट की आंते कमजोर हो जाती हैं ऐसी स्थिति में आप खिचड़ी और दही क…

फालसा - falsa फल

गर्मी के दिनों में फालसा एक उत्तम पौष्टिक फल है।
फालसा शरीर को निरोगी एवं हष्टपुष्ट बनाता है।  वैज्ञानिक दृष्टि से फालसे में विटामिन सी एवं केरोटीन तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है। 
फालसा स्निग्ध, चिकना, मधुर, खट्टा और तिक्त होता है।
फालसे के पके फल स्वाद में मधुर, स्वादिष्ट, पचने में हल्के, गर्मी शांत करने वाले, उल्टी मिटाने वाले, दस्त में सहायक व पेट के लिए शक्ति दायक एवं हृदय के लिए अत्यंत लाभदायक हैं।
फालसा रक्त पित्त नाशक, वात शामक, कफ को हरने वाला हिचकी व श्वास की तकलीफ में भी लाभकारी है।
गर्मियों के दिनों में शरीर में होने वाली गर्मी, जलन तथा पेट एवं दिमाग की कमजोरी फालसे के सेवन से दूर होती है। 
फालसे के औषधीय उपचार पेट का दर्द पेट दर्द के लिए अजवायन को सेंककर 3 ग्राम की मात्रा लेकर 25 या 30 ग्राम फालसे के रस में मिलाकर हल्का सा गर्म करके पीने से पेट दर्द में आराम मिलता है। 
पित्त विकार या पित्तदोष गर्मी के कारण होने वाले रोग जैसे आंखों की जलन, पेशाब की जलन, पेट की जलन, खट्टी डकार आदि की परेशानी में फालसे के रस का शर्बत बनाकर पीने से पित्त विकार मिटते हैं और अधिक गर्मी से …